एम्स के लिए 12 करोड़ की राशि रिलीज होने पर पहलवान खेमचंद सैनी ने जताया केंद्रीय मंत्री का आभार

लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी के जिलाध्यक्ष ने कहा, अस्पताल बनने से आसपास के गांवों के लोगों को होगा फायदा
फरीदाबाद। पृथला क्षेत्र के गांव फतेहपुर बिल्लौच में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान केंद्र द्वारा बनाए जाने वाले 50 बैड के अस्पताल की प्रक्रिया अब जोर पकडऩे लगी है। केंद्र सरकार द्वारा इस अस्पताल के निर्माण के लिए 12 करोड़ रूपए की राशि रिलीज की गई है, जिससे पृथला क्षेत्र के सैकड़ों गांवों के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी एवं सैनी सभा चौबीसी पाल के पूर्व प्रधान पहलवान खेमचंद सैनी ने अस्पताल के ग्रांट रिलीज होने पर केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर का आभार जताया है क्योंकि उनके प्रयासों से अब अस्पताल बनने की दिशा में यह बड़ा कदम होगा। यहां जारी प्रेस बयान में खेमचंद सैनी ने कहा कि वह पिछले कई वर्षाे से इस अस्पताल को बनवाने के लिए पत्रों के माध्यम से सरकार व प्रशासन से पत्राचार करते रहे और आज उसी का ही परिणाम है कि इस अस्पताल के निर्माण के लिए यह राशि रिलीज हुई है। उन्होंने एम्स के निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया, डा. संजय राय और डा. आनंद का भी आभार जताते हुए कहा कि इस अस्पताल को बनवाने के लिए उन्होंने भी उन्हें पूरा सहयोग दिया। गौरतलब है कि पृथला क्षेत्र के बड़े गांव फतेहपुर बिल्लौच में पिछले लगभग 15 वर्ष से लंबित एम्स के 200 करोड़ की लागत से 50 बिस्तरों का सीएचसी हॉस्पिटल के निर्माण की कवायद चल रही थी, आज केंद्रीय मंत्री स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात इस अस्पताल के निर्माण हेतु ग्रांट रिलीज कर दी। लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी के जिलाध्यक्ष खेमचंद सैनी ने बताया कि जब उनकी माता जी श्रीमती चंद्रोदेवी जब फतेहपुर बिल्लौच की सरपंच थी, उस दौरान इस अस्पताल के लिए 6 एकड़ ज्यादा जमीन निशुल्क ग्राम पंचायत द्वारा ग्रामीणों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर दी थी और उन्होंने उक्त जमीन को नंदराम पंडित के सहयोग से पंचायत से ट्रांसफर भी करवाया था और अस्पताल की जमीन के बदले उन्हें दूसरी जगह जमीन उपलब्ध करवाई थी और जमीन की एनओसी लेकर एम्स अस्पताल को दी थी, तब से आज तक इस अस्पताल को बनने का इंतजार करीब 40-50 गांवों के ग्रामीण क्षेत्र के लोग कर रहे है। उन्होंने इस प्रक्रिया में सहयोग देने के लिए ब्राह्मण समाज के लोगों का भी आभार जताया, जिन्होंने यह जमीन ट्रांसफर करके अस्पताल को दी। श्री सैनी ने कहा कि यह गांव एक कस्बा है। अगर यहां अस्पताल का निर्माण होता है तो आसपास के सभी गांवों के लोगों को बहुत फायदा होगा और जटिल बीमारियों के इलाज लिए वह इस अस्पताल से सीधा दिल्ली एम्स जा सकेंगे।

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