सत्ता के भागीदारों से हारे सामाजिक कार्यकर्ता, ठेका यहीं खुलेगा

ग्लोबल हरियाणा न्यूज़ / फरीदाबाद : सैक्टर-48 में चल रहे शराब के ठेके को हटाने के लिए लम्बे समय से सैक्टर-48 सोसायटी के लोग विशेषकर महिलाएं प्रयासरत्त थी। इसके लिए लगातार आन्दोलन किए गए, मगर लाख प्रयासों के बावजूद ठेके को यहां से नहीं हटाया गया। एक्साईज विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इस ठेके को अगली बार मंजूरी नहीं दी जाएगी और मार्च में इसका लाइसेंस खत्म होने वाला है। जिस पर संतोष जताते हुए सैक्टर-48 की महिलाओं ने चुप्पी साध ली। मगर हद तो जब हो गई, नए लाइसेंस जारी होने पर फिर से यहां ठेके को मंजूरी दे दी गई। जिसको लेकर संस्कार फाउंडेशन के बैनर तले सैंकड़ों की तादाद में महिलाओं ने एक्साईज विभाग एवं हुडा ऑफिस पर धरना एवं प्रदर्शन किया। हुडा विभाग की तरफ से परमिशन न होने के बावजूद भी यह ठेका हुडा की जमीन पर अवैध रूप से चल रहा था। इसके पीछे राजनीतिक संरक्षण माना जा रहा है। महिलाओं द्वारा बार-बार धरने-प्रदर्शन के बावजूद इस ठेके पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। लोकसभा चुनावों के दौरान प्रदर्शनकारी महिलाओं एवं समाजसेवी बाबा रामकेवल ने केन्द्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर का घेराव भी किया। इसके बाद कांग्रेसी प्रत्याशी अवतार भड़ाना की पत्नी ममता भड़ाना आन्दोलन में शामिल हुई और आन्दोलन का नेतृत्व कर रही परमिता चौधरी को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। उन्होंने ठेके को बंद करवाया और हुडा विभाग के अधिकारी ठेके को सील कर गए। इस सारे प्रकरण में सत्ता और प्रशासन की मिलीभगत किस हद तक थी, यह तब सामने आया जब चुनाव खत्म होने के बाद सील खोल दी गई और ठेका वहीं पर चलने लगा। जिससे आन्दोलनकारी महिलाओं के हौसले पस्त होते दिखाई दिए।  उन्होंने जब इसकी शिकायत हुडा अधिकारियों से की तो, उनको पता चला कि ठेके को परमिशन दे दी गई है। अब सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर किस राजनेता का दबाव था, जो लोगों के लाख विरोध के बावजूद यह ठेका बंद नहीं हो पा रहा था। चुनावों के दबाव में इस ठेके को कुछ समय के लिए सील करके प्रशासन ने जनता के साथ धोखा किया और इतना ही नहीं, जिस ठेके का इतने बड़े पैमाने पर विरोध किया जा रहा था, हुडा विभाग ने ही उस ठेके को मान्यता दे दी। बड़ा सवाल, यह है कि आखिर हुडा विभाग किस राजनेता के दबाव में यह सब कर रहा है या हुडा विभाग के अधिकारी मोटा पैसा खाकर स्वयं ही सब महिमामंडित कर रहे हैं। हमने ठेके को बंद करवाने के लिए लाख जतन किए, मगर स्थानीय नेताओं का संरक्षण इसको प्राप्त है, जिसके चलते लोगों की भावनाओं को दरकिनार कर यहां पर ठेके को चलने दिया जा रहा है। हुडा विभाग से परमिशन न होने के बावजूद ठेका लगातार खुला रहा और लोगों के भारी विरोध एवं लिखित शिकायत के बावजूद हुडा विभाग ने किसके दबाव में आकर ठेके को परमिशन दे दी, यह सोचनीय विषय है। जब स्थानीय सोसायटी के लोग ठेके का विरोध कर रहे हैं, तो ऐसी स्थिति में हुडा विभाग द्वारा परमिशन देना संशय का विषय है। क्या चंद रुपयों की खातिर लोगों की जनभावनाओं को दरकिनार करना सही है।परमिता चौधरी, अध्यक्ष संस्कार फाउंडेशनकेन्द्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर के मामा का अधिकतर ठेकों में शेयर है और उन्हीं का संरक्षण इसको प्राप्त है। जिसके चलते हुडा विभाग ने भी लाख विरोध के बावजूद ठेके को परमिशन दे दी और इसके आधार पर कोर्ट से स्टे भी ले आए।

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