मोर की आकृति ने अकीला को दिखाई कौशल विकास की राह

-देश विदेशों में अकीला के हैंड वर्क परिधानों की खासी डिमांड
सूरजकुंड, 02 अप्रैल। खुद के दुप्पटे पर ट्रायल के तौर पर की गई कारिगिरी ने सिलाई कढ़ाई के क्ष्रेत्र में अलीगढ़ की अकीला बानो को एक कुशल हुनरमंद बना दिया। इसी हुनर की बदौलत वह अन्य महिलाओं को भी इस कला में पारंगत बनाकर उन्हें स्व रोजगार से जोड़ रही हैं।35 वे सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्त शिल्प मेले में अकीला बानो की कपड़ों पर हस्त शिल्प कला को देखकर आने वाले पर्यटक ख़ासे प्रभावित हो रहे हैं।साथ ही उसके तैयार परिधान खरीदने  के लिए स्टाल नंबर 1039 पर महिलाओं की आ अच्छी खासी भीड़ उमड़ रही है।
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की रहने वाली अकीला बानो ने करीब 30 साल पहले सुंई धागा थाम कर अपने ही दुप्पटे पर राष्ट्रीय पक्षी मोर की आकृति उकेरी। जब इस दुप्पटे को पड़ोसी महिलाओं ने देखा तो अकीला के हुनर की कायल हो गई। महिलाओं ने उसे इस क्षेत्र में हाथ आजमाने के लिए प्रोत्साहित किया। तब से लेकर आज तक सकीला बानो ने देश व विदेश में हैंड वर्क आइटम के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई।

हैंड वर्क आइटम की मेले में भरमार
अकीला बानो की स्टाल नम्बर 1039 पर कॉटन पर हैंड वर्क के सूट,साड़ी, दुपट्टा, कुर्ता, बेड सीट,पर्दे और कुशन कवर की अच्छी खासी डिमांड है। अकीला बानो के इस काम को अब उनकी बेटी उजमा और भाई यूनस बखूबी आगे बढ़ा रहे हैं। उजमा ने बताया कि अब उनके ग्रुप में लगभग डेढ़ सौ महिलाएं जुड़ कर स्वावलंबन की राह पर हैं।
बेटी उजमा ने बताया कि उनकी मां के हुनर को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा अवार्ड के लिए चयनित किया गया है। वहीं राज्य सरकार के कौशल विकास प्रशिक्षण विभाग द्वारा उन्हें अवार्ड दिया जा चुका है।

कला और संस्कृति प्रेमियों के लिए, मेले के दो दिन शेष
सूरजकुंड में 19 मार्च से शुरू हुआ 35 वां अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला 4 अप्रैल को सम्पन्न हो जाएगा। ऐसे में कला व संस्कृति प्रेमियों के लिए रविवार और सोमवार दो दिन शेष बचे हैं। इन दो दिनों में सभी देशी विदेशी हुनरमंद लोगों को जहां अपने उत्पाद अधिक संख्या में बिक्री होने की उम्मीद है,वहीं कला प्रेमियों के लिए वीक ऐंड भी मनोरंजन के लिहाज से अच्छा रहेगा।

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