वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय प्रताप ने मां दुर्गा की स्तुति की व लिया आशीर्वाद

ग्लोबल हरियाणा न्यूज़ / फरीदाबाद / हरजिन्दर शर्मा / 12 अक्टूबर 2021: एन.एच.5 स्थित तत्कालेश्वर शिव मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर आयोजित माता की चौकी में वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय प्रताप सिंह ने शिरकत की और मां दुर्गा का नमन किया व आशीर्वाद प्राप्त किया। तत्कालेश्वर मंदिर में विशेष रूप से ज्वाला जी से लाई गई माता की ज्योत प्रज्जवलि थी। जिसे 4 दिन में भक्तमंडली द्वारा लाया गया था।

विजय प्रताप ने माता रानी की ज्योत ली और माता रानी के दरबार में माथा टेका। विजय प्रताप ने कहा कि हमारा शास्त्रों में हमारे सनातन में दो बार नवरात्रे आते हैं। हिन्दू धर्म में शारदीय नवरात्रों का विशेष महत्व है। विशेषकर टाउनशिप में सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

 इस मौके पर श्री विजय प्रताप ने कहा कि वैसे तो मां भगवती के अनेकों नाम है, लेकिन भक्तों को उनका दुर्गा नाम विशेष प्रिय है। उन्होंने मां भगवती को दुर्गा नाम प्राप्त होने की पौराणिक कथा का विवरण करते हुए बताया कि दुर्गम नामक दैत्य ने भगवान ब्रह्म की कठोर तपस्या कर वरदान प्राप्त कर लिया। जिसके बाद दुर्गम सभी वेदों का वश में कर यज्ञ का ध्वंश करने लगा। उसने स्वर्ग पर अपना अधिकार कर लिया और पूरा ब्रह्मण्ड उसके आतंक से कांपने लगा। जिसके बाद सारे देवता विनती करते हुए मां भगवती के पास गए और उनसे अपनी व्यथा कही। देवताओं का कष्ट सुनकर मां ने दुर्गम का अंत करने का निश्चय कर लिया। दुर्गम को इस बात का ज्ञात होने के साथ उसने युद्ध की तैयारी कर ली और अपनी सेना साथ लेकर मां भगवती से युद्ध करने पहुंच गया। युद्ध में मां भगवती ने समस्त सेना का संहार कर दिया। जिसके बाद दुर्गम एवं मां भगवती के बीच भयंकर युद्ध हुआ। जिसमें मां भगवती ने दुर्गम को पराजित कर मौत के घाट उतार दिया। देवताओं सहित पूरे ब्रह्मण्ड को दुर्गम के अंत से खुशी मिली। इसके बाद मां भगवती को दुर्गा नाम मिला।

 इस मौके पर श्री विजय प्रताप ने कहा कि वैसे तो मां भगवती के अनेकों नाम है, लेकिन भक्तों को उनका दुर्गा नाम विशेष प्रिय है। उन्होंने मां भगवती को दुर्गा नाम प्राप्त होने की पौराणिक कथा का विवरण करते हुए बताया कि दुर्गम नामक दैत्य ने भगवान ब्रह्म की कठोर तपस्या कर वरदान प्राप्त कर लिया। जिसके बाद दुर्गम सभी वेदों का वश में कर यज्ञ का ध्वंश करने लगा। उसने स्वर्ग पर अपना अधिकार कर लिया और पूरा ब्रह्मण्ड उसके आतंक से कांपने लगा। जिसके बाद सारे देवता विनती करते हुए मां भगवती के पास गए और उनसे अपनी व्यथा कही। देवताओं का कष्ट सुनकर मां ने दुर्गम का अंत करने का निश्चय कर लिया। दुर्गम को इस बात का ज्ञात होने के साथ उसने युद्ध की तैयारी कर ली और अपनी सेना साथ लेकर मां भगवती से युद्ध करने पहुंच गया। युद्ध में मां भगवती ने समस्त सेना का संहार कर दिया। जिसके बाद दुर्गम एवं मां भगवती के बीच भयंकर युद्ध हुआ। जिसमें मां भगवती ने दुर्गम को पराजित कर मौत के घाट उतार दिया। देवताओं सहित पूरे ब्रह्मण्ड को दुर्गम के अंत से खुशी मिली। इसके बाद मां भगवती को दुर्गा नाम मिला।

विजय प्रताप ने सुंदर कार्यक्रम के आयोजन के लिए मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मंदिर कमेटी के सदस्यों ने विजय प्रताप का पटका पहनाकर स्वागत किया और मां दुर्गा के मधुर भजनों पर वह थिरके भी। विजय प्रताप ने मंदिर कमेटी को 11 हजार रुपए का सहयोग किया। 

इस कार्यक्रम में उनके साथ पदम सिंह भड़ाना, राकेश कोहली, हर्ष मल्होत्रा, संजय शर्मा, महेश बजाज, सुनील महाजन, राजेन्द्र आहूजा, विनोद मुंजाल, सरोज, पूनम ग्रोवर सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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