प्रख्यात टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस का मानव रचना ने किया स्वागत

ग्लोबल हरियाणा न्यूज़/फरीदाबाद :28 नवंबर लिएंडर पेस एक प्रख्यात भारतीय टेनिस खिलाड़ी है, जिनको सर्वश्रेष्ठ डबल्स और मिश्रित युगल खिलाड़ियों में से एक माना जाता है, इन्होने प्रत्येक अनुशासन में ग्रैंड स्लैम हासिल किया है।

लिएंडर ने आठ युगल और दस मिश्रित युगल ग्रैंड स्लैम खिताब जीते हैं। 2010 में उनके मिश्रित युगल विंबलडन के खिताब ने उन्हें तीन दशक में विंबलडन खिताब जीतने वाला पूर्ण विश्व में दूसरा खिलाड़ी (रॉड लावर के बाद) बनाया।

सबसे सफल पेशेवर टेनिस टेनिस खिलाड़ियों में से एक, उन्हें 1996 – 97  में भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान, राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार मिला है; 1990  में अर्जुन पुरस्कार; 2001 में पद्मश्री पुरस्कार और जनवरी 2014 में भारत में टेनिस में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्म भूषण का तीसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भी मिला है।

लिएंडर ने मानव रचना इंटरनेशनल स्कूल तथा मानव रचना शैक्षणिक संस्थान का दौरा किया | उनके साथ डॉ अमित भल्ला, उपाध्यक्ष, मानव रचना शैक्षणिक संस्थान; श्री सरकार तलवार, खेल अध्यक्ष, मानव रचना स्पोर्ट्स अकैडमी; सुश्री ममता वाधवा, अध्यक्ष प्रिंसिपल, मानव रचना इंटरनेशनल स्कूल, सेक्टर 14 , ऐस शूटर श्री रंजन सोढ़ी और कई अन्य वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति भी थे ।

लिएंडर ने स्कूल के उन छात्रों के प्रति बहुत रुचि दिखाई, जो टेनिस के बारे में जानने व अपना करियर बनाने के लिए बेहद उत्सुक थे। न सिर्फ ये उन्होंने छात्रों को कुछ टिप्स भी दिए | उन्होंने स्कूल के प्रदर्शन क्षेत्र का भी दौरा किया और सुलेख और चित्रकला कक्षाओं में भाग लिया।

उन्होंने शूटिंग में 10 पर 10 स्कोर हासिल किया और हमारे युवा खिलाड़ियों के साथ टेबल टेनिस खेला।

मानव रचना के दो छात्र- जिया रावत और नवीन कपूर जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने पदों को सुरक्षित किया है, उन्हें श्री लिएंडर पेस द्वारा पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

मानव रचना शैक्षणिक संस्थान के दौरे पे लिएंडर ने स्पोर्ट्स साइंस सेंटर का विशेष दौरा किया तथा वहां मौजूद तकनिकी सुविधाओं की भी सराहना की | मानव रचना स्पोर्ट्स साइंस सेंटर में विस्तृत प्रदर्शन विश्लेषण का भी उन्होंने उपयोग किया एवं उससे काफी प्रभावित हुए ।

यह उन सभी लोगों के लिए एक अद्भुत अनुभव था जो इस महान खिलाड़ी से मिले और मानव रचना निश्चित रूप से इस स्मृति को संजो के रखेगा।

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