छोटे ई-स्टांप पेपर सिर्फ स्टांप विक्रेता ही निकाल पाएंगे,आम लोगों के ई-स्टांप पेपर निकालने पर रोक लगा दी!

Only small e-stamp paper stamp dealerअब छोटे ई-स्टांप पेपर सिर्फ स्टांप विक्रेता ही निकाल पाएंगे। सरकार ने आम लोगों के ई-स्टांप पेपर निकालने पर रोक लगा दी है और स्टांप विक्रेताओं को कोड नंबर दे दिया है। इस तरह से आम आदमी के लिए एक बार फिर से परेशानी बढ़ गई है।

जब कागज के छपे हुए स्टांप पेपर थे, तब शपथ पत्र आदि बनवाने के लिए लोगों को स्टांप पेपर विक्रेता से ही स्टांप पेपर खरीदना पड़ता था। तब सरकार ने स्टांप पेपर विक्रेता को 10 हजार रुपये तक के स्टांप पेपर बेचने का अधिकार दिया हुआ था। यदि 10 हजार रुपये से अधिक के स्टांप पेपर की जरूरत होती तो तब लोगों को सरकारी खजाने में रुपये जमाकर के खुद स्टांप पेपर खरीद कर लाना पड़ता था। सरकार स्टांप पेपर विक्रेता को 3 फीसद कमीशन देती थी। लोगों को सरकारी खजाने और स्टांप पेपर विक्रेता के चक्कर न काटने पड़े, इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने ई-स्टांप पेपर की शुरुआत कर दी। इसके बाद लोग अपने खाते से सीधे सरकारी खजाने में स्टांप पेपर की कीमत जमा कराकर ई-स्टांप पेपर का कंप्यूटर से ¨प्रट निकाल कर शपथ पत्र आदि तैयार करा लेते थे। इस तरह से स्टांप पेपर विक्रेताओं का काम ठप हो गया।

इस मामले में स्टांप पेपर विक्रेताओं ने सरकार को बताया कि उनका तो काम पूरी तरह से ठप हो गया है। अब उन्हें कौन कमीशन देगा। स्टांप पेपर विक्रेताओं की बात को सुनकर सरकार ने फिर से आम आदमी के 10 हजार रुपये से कम के स्टांप पेपर निकालने पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब लोगों को 10 हजार से कम के स्टांप पेपर लेने के लिए एक बार फिर से स्टांप पेपर विक्रेता के पास तहसील परिसर में जाना होगा। इस तरह से ऑनलाइन ई-स्टांप पेपर का आम आदमी को लाभ नहीं मिलने वाला।

स्टांप पेपर विक्रेताओं ने सरकार के सामने अपनी समस्या रखी तो सरकार ने आम आदमी के ई-स्टांप पेपर निकालने पर पाबंदी लगा दी है। 10 हजार रुपये तक स्टांप पेपर विक्रेता ही निकाल कर देंगे। स्टांप पेपर विक्रेता को सरकार ने कोड नंबर दे दिया है। यदि किसी को 10 हजार रुपये से अधिक का स्टांप पेपर लेना है तो उसे सीधे ऑनलाइन भुगतान करके निकाला जा सकता है।

 

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