आईआईएम उदयपुर में डिजिटल एंटरप्राइज मैनेजमेंट और ग्लोबल सप्लाई चेन मैनेजमेंट में एक वर्षीय पूर्णकालिक एमबीए के 2022-23 बैचों का उद्घाटन

आज सुबह 10 बजे तनिष्क के पिता शैतान सिंह ने चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा के बंगले पर तनिष्क के ईलाज के लिए गुहार लगाई परंतु मंत्री जी ने यह कहा कि 16 करोड़ का ऐसा कोनसा इंजेक्शन आता है इस पर मुख्यमंत्री ही कुछ कर पायेंगे। जबकि तनिष्क के पिता मुख्यमंत्री जी से जनसुनवायी के दौरान मिल चुके है उन्होंने आश्वासन दीया परंतु चिकित्सा मंत्री जी ने तो हाथ खड़े कर दियेदुर्भाग्य कि बात ये है कि प्रदेश का मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ही जब हाथ खड़े कर दे तब किस से गुहाक लगायें।शुक्रवार की रात को तनिष्क को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और बेहोशी की हालत में था तो उसे परबतसर हॉस्पिटल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने कहा कि बच्चे में ब्लड की कमी है और इसे आप सीधे जेकेलोन की दिखाएजेकेलोन में तनिष्क को आईसीयू में रखा हुआ है अभी तक और तनिष्क के हालत वैसे ही  है , तनिष्क के माता पिता का कहना है कि वह सरकार से बार गुहार लगा चुके हैं ,हनुमान बेनीवाल  भी लोकसभा में यह मुद्दा उठा चुके हैंतनिष्क के पिता शैतान सिंह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी से भी मिले उन्होंने भी आश्वासन दिया परंतु अभी तक किसी प्रकार की कोई सहायता नहीं मिली है सरकार से।तनिष्क के पिता सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि चिरंजीव योजना के अंतर्गत  दुर्लभ बीमारियां को भी जोड़ा जाए ताकि इस तरह की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को सहायता मिल सके और एक अलग SMA relief fund का निर्माण किया जाए ताकि तनिष्क जैसे दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे बच्चों को सहायता मिलेअरे सरकार से यह निवेदन है कि सरकार खुद के स्तर पर क्राउडफंडिंग करवाएं

उदयपुर, 07 अप्रैल 2022- भारतीय प्रबंधन संस्थान, उदयपुर ने शैक्षणिक वर्ष 2022-23 के लिए अपने एक वर्षीय एमबीए – ग्लोबल सप्लाई चेन मैनेजमेंट (जीएससीएम) कार्यक्रम के दसवें बैच और एक वर्षीय एमबीए – डिजिटल एंटरप्राइज मैनेजमेंट (डीईएम) के तीसरे बैच की शुरुआत की है।

उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता आईआईएम उदयपुर के डायरेक्टर प्रो जनत शाह और एक वर्षीय एमबीए प्रोग्राम कमेटी के चेयरपर्सन प्रो राजेश अग्रवाल ने की। श्री कामेश मुल्लापुडी, मैनेजिंग डायरेक्टर, डेलॉइट कंसल्टिंग (यूएस-इंडिया) और श्री सी पी गुरनानी, सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर, टेक महिंद्रा उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

अपने स्वागत भाषण में डायरेक्टर प्रो जनत शाह ने कहा, ‘‘कोविड से उपजे हालात के बाद दो साल में पहली बार मैं इस साल ऑफ़लाइन सत्रों में आप सभी का स्वागत कर रहा हूं। फिर से ऑफ़लाइन सत्रों की शुरुआत होना हमारे लिए और विद्यार्थी समुदाय के लिए वाकई खुशी की बात है। हमारे जैसे प्रमुख प्रबंधन संस्थान के लिए आमने-सामने के ऑफ़लाइन सत्रों के जरिये शिक्षा प्रदान करना हमेशा महत्वपूर्ण रहा है।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘आईआईएम उदयपुर ने अपनी परिवर्तनकारी यात्रा के दस साल पूरे कर लिए हैं। शुरुआत से ही, हमने उच्च स्तर की निष्ठा, पारदर्शिता, वैश्विक मान्यता, अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग, निरंतरता और उत्कृष्टता के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ वैश्विक ख्याति प्राप्त संस्थान की कल्पना की है। आईआईएमयू के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक है इसका रिसर्च पर फोकस करने का प्रयास। एक अकादमिक संस्थान के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भविष्य की दुनिया रिसर्च के आधार पर ही संचालित होगी। हम, एक संस्थान के रूप में, एकेडमिक रिसर्च के क्षेत्र में सबसे आगे रहना चाहते हैं। हमने भारतीय बिजनेस स्कूलों से संबंधित यूटी डलास बिजनेस स्कूल रिसर्च रैंकिंग में, तीन वर्षों तक लगातार चौथे स्थान पर रहकर रिसर्च के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई है। हमारे पास एक महत्वाकांक्षी ‘विजन 2030’ है, जहां हम यूटी डलास शीर्ष 100 रैंकिंग में स्थान हासिल करना चाहते हैं, जहां वर्तमान में हमारे देश से कोई संस्थान नहीं है।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘आईआईएमयू ने एक विशिष्ट संस्थान होने पर ध्यान केंद्रित किया है, और डिजिटल एंटरप्राइज मैनेजमेंट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के साथ-साथ एमबीए-डीईएम प्रोग्राम ने हमारे इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हम एक भविष्यवादी शैक्षणिक संस्थान की पहचान हासिल करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और भविष्य के लिए अग्रणी लोगों को तैयार करने के काम में जुटे हैं।’’

नए बैच को संबोधित करते हुए जीएससीएम प्रोग्राम के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि श्री कामेश मुल्लापुडी, मैनेजिंग डायरेक्टर, डेलॉइट कंसल्टिंग (यूएस-इंडिया) ने संगठनों में सप्लाई चेन्स का प्रबंधन करते हुए ग्राहकों के दृष्टिकोण को समझाया। उन्होंने कहा, ‘‘मैनेजमेंट स्टडीज में डिजिटल और टैक्नोलॉजी की शुरूआत समय की आवश्यकता है और खुशी की बात है कि आईआईएम उदयपुर इसमें सबसे आगे रहा है। हाल ही में कोविड महामारी ने दुनियाभर में सप्लाई चेन के मैनेजमेंट और मेंटिनेंस के क्षेत्र में मौजूद जटिलताओं को हमारे सामने रखा। यहां तक कि हालिया रूस-यूक्रेन युद्ध और सप्लाई चेन में रुकावट जैसे हालात ने सप्लाई चेन से जुड़े पेशेवरों को उनकी भूमिका के बारे में सोचने के लिए बाध्य किया है। दरअसल वर्तमान दौर में कार्य संचालन का डिजिटलीकरण और एनालिटिक्स अब बहुत महत्वपूर्ण हो गया है।’’

उन्होंने इस सवाल के साथ अपना वक्तव्य समाप्त किया, ‘‘भविष्य के प्रबंधक को क्या चाहिए?’’ और इसका उत्तर इस प्रकार दिया- ‘‘उसमें सीखने की क्षमता का होना बेहद जरूरी है। इसका अर्थ यह हुआ कि उसे सीखने की कला पर ध्यान केंद्रित करना होगा, साथ ही उसे बदलते वक्त के अनुसार अपने आपको बदलने के लिए भी तैयार रहना होगा, तभी वह न्यू नॉर्मल के अनुसार सफलतापूर्वक संगठनों को चला सकेगा। और उसमें इस काम को मानवीय स्पर्श के साथ सहानुभूतिपूर्वक पूरा करने की क्षमता भी होनी चाहिए।’’

डीईएम प्रोग्राम के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि श्री सी पी गुरनानी, सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर, टेक महिंद्रा ने कहा, ‘‘आज जबकि आप भविष्य के डिजिटल मैनेजर और अग्रणी बनने के लिए यहां हैं, तो मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि आईआईएम उदयपुर ने पाठ्यक्रम की दिशा में भी इनोवेशन की शुरुआत की और इसी दिशा में कदम उठाते हुए संस्थान में डिजिटल उद्यम के लिए एक केंद्र स्थापित किया। ग्लोबल सप्लाई चेन मैनेजमेंट और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दुनिया में आए बदलावों को समझते हुए आईआईएम उदयपुर ने उद्योग से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों को अकादमिक शिक्षा के साथ जोड़ा है और यह प्रयास अपने आप में अभूतपूर्व है। मेरा मानना है कि डिजिटल और व्यावसायिक परिवर्तन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आप जो कुछ सीखते हैं, असली महत्व उसका है, न कि आपकी डिग्री का। नई चीजों को अपनाने के लिए आप किस हद तक तैयार रहते हैं, यह बात मायने रखती है, न कि आपकी उम्र। अगर हम भविष्य के बारे में पूर्वानुमान लगा सकें, और यह जान सके कि वह क्या है जो भविष्य में भी प्रासंगिक बना रहेगा, तो हममें से हर कोई सफल हो सकता है। क्वांटम कंप्यूटिंग, वेब 3.0, मेटावर्स या ब्लॉकचेन इन सबके भविष्य के बारे में पूर्वानुमान लगाना आज बेहद महत्वपूर्ण है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन सी तकनीक व्यवसाय की समस्या का समाधान करती है, बल्कि यह तथ्य है कि आप व्यवसाय की समस्याओं को डिजिटल रूप से हल करने की संभावना तलाशना सीखते हैं।’’

आईआईएम उदयपुर भारत का एकमात्र प्रबंधन संस्थान है जिसने डीईएम में पूर्णकालिक एमबीए प्रोग्राम शुरू किया है। जीएससीएम में पूर्णकालिक एक वर्षीय एमबीए करने वाला भी यह एकमात्र आईआईएम है। डीईएम और जीएससीएम कार्यक्रम किसी भी विषय में स्नातकों के लिए किसी भी क्षेत्र में 3+ वर्ष के अनुभव के साथ 1 वर्षीय पूर्णकालिक आवासीय एमबीए प्रोग्राम हैं।

आईआईएम उदयपुर में डिजिटल एंटरप्राइज मैनेजमेंट और ग्लोबल सप्लाई चेन मैनेजमेंट में एक वर्षीय पूर्णकालिक एमबीए के 2022-23 बैचों का उद्घाटन

उदयपुर, 07 अप्रैल 2022- भारतीय प्रबंधन संस्थान, उदयपुर ने शैक्षणिक वर्ष 2022-23 के लिए अपने एक वर्षीय एमबीए – ग्लोबल सप्लाई चेन मैनेजमेंट (जीएससीएम) कार्यक्रम के दसवें बैच और एक वर्षीय एमबीए – डिजिटल एंटरप्राइज मैनेजमेंट (डीईएम) के तीसरे बैच की शुरुआत की है।

उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता आईआईएम उदयपुर के डायरेक्टर प्रो जनत शाह और एक वर्षीय एमबीए प्रोग्राम कमेटी के चेयरपर्सन प्रो राजेश अग्रवाल ने की। श्री कामेश मुल्लापुडी, मैनेजिंग डायरेक्टर, डेलॉइट कंसल्टिंग (यूएस-इंडिया) और श्री सी पी गुरनानी, सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर, टेक महिंद्रा उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

अपने स्वागत भाषण में डायरेक्टर प्रो जनत शाह ने कहा, ‘‘कोविड से उपजे हालात के बाद दो साल में पहली बार मैं इस साल ऑफ़लाइन सत्रों में आप सभी का स्वागत कर रहा हूं। फिर से ऑफ़लाइन सत्रों की शुरुआत होना हमारे लिए और विद्यार्थी समुदाय के लिए वाकई खुशी की बात है। हमारे जैसे प्रमुख प्रबंधन संस्थान के लिए आमने-सामने के ऑफ़लाइन सत्रों के जरिये शिक्षा प्रदान करना हमेशा महत्वपूर्ण रहा है।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘आईआईएम उदयपुर ने अपनी परिवर्तनकारी यात्रा के दस साल पूरे कर लिए हैं। शुरुआत से ही, हमने उच्च स्तर की निष्ठा, पारदर्शिता, वैश्विक मान्यता, अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग, निरंतरता और उत्कृष्टता के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ वैश्विक ख्याति प्राप्त संस्थान की कल्पना की है। आईआईएमयू के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक है इसका रिसर्च पर फोकस करने का प्रयास। एक अकादमिक संस्थान के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भविष्य की दुनिया रिसर्च के आधार पर ही संचालित होगी। हम, एक संस्थान के रूप में, एकेडमिक रिसर्च के क्षेत्र में सबसे आगे रहना चाहते हैं। हमने भारतीय बिजनेस स्कूलों से संबंधित यूटी डलास बिजनेस स्कूल रिसर्च रैंकिंग में, तीन वर्षों तक लगातार चौथे स्थान पर रहकर रिसर्च के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई है। हमारे पास एक महत्वाकांक्षी ‘विजन 2030’ है, जहां हम यूटी डलास शीर्ष 100 रैंकिंग में स्थान हासिल करना चाहते हैं, जहां वर्तमान में हमारे देश से कोई संस्थान नहीं है।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘आईआईएमयू ने एक विशिष्ट संस्थान होने पर ध्यान केंद्रित किया है, और डिजिटल एंटरप्राइज मैनेजमेंट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के साथ-साथ एमबीए-डीईएम प्रोग्राम ने हमारे इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हम एक भविष्यवादी शैक्षणिक संस्थान की पहचान हासिल करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और भविष्य के लिए अग्रणी लोगों को तैयार करने के काम में जुटे हैं।’’

नए बैच को संबोधित करते हुए जीएससीएम प्रोग्राम के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि श्री कामेश मुल्लापुडी, मैनेजिंग डायरेक्टर, डेलॉइट कंसल्टिंग (यूएस-इंडिया) ने संगठनों में सप्लाई चेन्स का प्रबंधन करते हुए ग्राहकों के दृष्टिकोण को समझाया। उन्होंने कहा, ‘‘मैनेजमेंट स्टडीज में डिजिटल और टैक्नोलॉजी की शुरूआत समय की आवश्यकता है और खुशी की बात है कि आईआईएम उदयपुर इसमें सबसे आगे रहा है। हाल ही में कोविड महामारी ने दुनियाभर में सप्लाई चेन के मैनेजमेंट और मेंटिनेंस के क्षेत्र में मौजूद जटिलताओं को हमारे सामने रखा। यहां तक कि हालिया रूस-यूक्रेन युद्ध और सप्लाई चेन में रुकावट जैसे हालात ने सप्लाई चेन से जुड़े पेशेवरों को उनकी भूमिका के बारे में सोचने के लिए बाध्य किया है। दरअसल वर्तमान दौर में कार्य संचालन का डिजिटलीकरण और एनालिटिक्स अब बहुत महत्वपूर्ण हो गया है।’’

उन्होंने इस सवाल के साथ अपना वक्तव्य समाप्त किया, ‘‘भविष्य के प्रबंधक को क्या चाहिए?’’ और इसका उत्तर इस प्रकार दिया- ‘‘उसमें सीखने की क्षमता का होना बेहद जरूरी है। इसका अर्थ यह हुआ कि उसे सीखने की कला पर ध्यान केंद्रित करना होगा, साथ ही उसे बदलते वक्त के अनुसार अपने आपको बदलने के लिए भी तैयार रहना होगा, तभी वह न्यू नॉर्मल के अनुसार सफलतापूर्वक संगठनों को चला सकेगा। और उसमें इस काम को मानवीय स्पर्श के साथ सहानुभूतिपूर्वक पूरा करने की क्षमता भी होनी चाहिए।’’

डीईएम प्रोग्राम के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि श्री सी पी गुरनानी, सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर, टेक महिंद्रा ने कहा, ‘‘आज जबकि आप भविष्य के डिजिटल मैनेजर और अग्रणी बनने के लिए यहां हैं, तो मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि आईआईएम उदयपुर ने पाठ्यक्रम की दिशा में भी इनोवेशन की शुरुआत की और इसी दिशा में कदम उठाते हुए संस्थान में डिजिटल उद्यम के लिए एक केंद्र स्थापित किया। ग्लोबल सप्लाई चेन मैनेजमेंट और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दुनिया में आए बदलावों को समझते हुए आईआईएम उदयपुर ने उद्योग से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों को अकादमिक शिक्षा के साथ जोड़ा है और यह प्रयास अपने आप में अभूतपूर्व है। मेरा मानना है कि डिजिटल और व्यावसायिक परिवर्तन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आप जो कुछ सीखते हैं, असली महत्व उसका है, न कि आपकी डिग्री का। नई चीजों को अपनाने के लिए आप किस हद तक तैयार रहते हैं, यह बात मायने रखती है, न कि आपकी उम्र। अगर हम भविष्य के बारे में पूर्वानुमान लगा सकें, और यह जान सके कि वह क्या है जो भविष्य में भी प्रासंगिक बना रहेगा, तो हममें से हर कोई सफल हो सकता है। क्वांटम कंप्यूटिंग, वेब 3.0, मेटावर्स या ब्लॉकचेन इन सबके भविष्य के बारे में पूर्वानुमान लगाना आज बेहद महत्वपूर्ण है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन सी तकनीक व्यवसाय की समस्या का समाधान करती है, बल्कि यह तथ्य है कि आप व्यवसाय की समस्याओं को डिजिटल रूप से हल करने की संभावना तलाशना सीखते हैं।’’

आईआईएम उदयपुर भारत का एकमात्र प्रबंधन संस्थान है जिसने डीईएम में पूर्णकालिक एमबीए प्रोग्राम शुरू किया है। जीएससीएम में पूर्णकालिक एक वर्षीय एमबीए करने वाला भी यह एकमात्र आईआईएम है। डीईएम और जीएससीएम कार्यक्रम किसी भी विषय में स्नातकों के लिए किसी भी क्षेत्र में 3+ वर्ष के अनुभव के साथ 1 वर्षीय पूर्णकालिक आवासीय एमबीए प्रोग्राम हैं।

18 महीने का तनिष्क सिंह ( Tanishk Singh ) जिनेटिक ( Spinal Muscular Atrophy Type-1 ) स्पाइनल मस्कुलर अट्रोफी टाइप-1 (SMA) जैसी दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है। तनिष्क को इलाज के लिए एक इंजेक्शन की जरूरत है जिसकी कीमत 16 करोड़ रुपये है। हाल ही में इस बीमारी से पीड़ित बच्चें के इलाज के लिए पीएम मोदी की ओर से 6 करोड़ का टैक्स माफ किया गया था।तनिष्क, 9 महीने का है, लेकिन अभी तक वह सहारा देने के बाद भी अपने पैरों पर खड़ा नहीं रहा। खुद से बैठ नहीं सकता। यहां तक कि उसकी छाती की मांसपेशियों में इतनी ताकत भी नहीं बची है कि वह अच्छे से पूरी सांस ले सके। ईश्वर ने उसे मस्तिष्क दिया है, बोली भी दी है, लेकिन एक जीन नहीं दिया। यह जीन शरीर में खास किश्म का प्रोटीन बनाता है, जिससे शरीर की सारी मांसपेशियां काम करती हैं। इस जीन के बिना तनिष्क का जीवन अधूरा है। केवल एक इंजेक्शन, तनिष्क की सारी समस्या का समाधान है, लेकिन इस एक इंजेक्शन की कीमत 16 करोड़ रुपये है, जो तनिष्क के माता-पिता के लिए जुटा पाना आसान नहीं है।राजस्थान के नागौर जिले में छोटें से गांव नड़वा ( Narwa ) के रहने वाले दीपिका कंवर और शैतान सिंह की इकलौती संतान तनिष्क ( Spinal Muscular Atrophy Type-1 ) स्पाइनल मस्कुलर अट्रोफी टाइप-1  दुर्लभ बीमारी  से ग्रहसित हैं। परबतसर जैसे छोटे से कस्बें में वकील के तौर पर काम करने वाले शैतान सिंह ने बताया कि जब वह चार-पांच महीने का था, तभी से उसकी परेशानी शुरू हो गई थी। शुरू में बीमारी पकड़ में नहीं आई, लेकिन बाद में जे.के. लोन हॉस्पिटल जयपुर के निवर्तमान सह आचार्य डॉ. प्रियांशु माथुर ने देखा तो बता दिया कि तनिष्क सिंह एसएमए की बीमारी से पीड़ित है।शैतान सिंह ने कहा कि अभी तक तनिष्क को फिजियोथेरेपी और व्यायाम के सहारे से हम नियंत्रण करके रखे हुए हैं, ताकि उसके शरीर की सभी मांसपेशियां सक्रिय रहें। इसके लिए हर 2 दिन में फीजियोथेरपिस्ट को लाना पड़ता है। बाकी पूरे दिन में तीन से चार घंटे फेमिली वाले बारी-बारी से उसके शरीर की मांसपेशियों की एक्सरसाइज कराते हैं। शैतान सिंह ने कहा कि इसका इलाज दुनिया का सबसे महंगा इंजेक्शन जोल्गेन्स्मा( Zolegensma ) है। मुंबई में एक बच्ची इस बीमारी से पीड़ित है, उसके लिए क्राउड फंडिंग से पैसा जुटाया गया था और मोदी सरकार ने दवा पर लगने वाला 5 करोड़ का टैक्स माफ कर दिया था। उसके बाद से ही हममें हिम्मत के साथ उम्मीद जगी है। यह देश दयालु और कृपालुओं का है और मुझे उम्मीद है कि सभीलोग मेरे बेटे की जान बचाने के लिए जरूर मदद करेंगे। तनिष्क के माता-पिता ने सोशल मिडिया के जरिये देश की जनता के साथ-साथ पीएम मोदी, सीएम अशोक गहलोत, फिल्म कलाकार और समाज सेवी सोनु सूद, और नागौर सांसद हनुमान बेनिवाल से मदद की गुहार लगाई है।

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