क्या एलआईसी आईपीओ की पॉलिसीधारक श्रेणी खुदरा निवेशकों के आईपीओ देखने के तरीके को बदल सकते हैं?

एलआईसी आईपीओ की पॉलिसीधारक श्रेणी क्‍या बदलेगी खुदरा निवेशकों के आईपीओ देखने का तरीका?

अरिजीत मालाकार, हेड ऑफ रिटेल इक्विटी रिसर्च, आशिका ग्रुप का शीर्षक व्हाट मेक मेक एलआईसी आईपीओ इंडिया की सबसे बड़ी और बहुप्रतीक्षित लिस्टिंग है?

बहुप्रतीक्षित आईपीओ (आरंभिक सार्वजनिक निर्गम) में से एक भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का प्रस्तावित आईपीओ निवेशक समुदाय के बीच फुसफुसाहट और अनुमानों को जन्म दे रहा है। इस आईपीओ के जरिए अपनी 5% हिस्सेदारी बेच रही देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी ने कुछ ऐसे दिशानिर्देशों को पेश किया है, जो ट्रेंड का निर्माण करने की क्षमता रखते हैं। विनिवेश के कुल हिस्से में से, आरंभिक सार्वजनिक निर्गम का लगभग 35% हिस्‍सा खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित है। आईपीओ में खुदरा भागीदारी बढ़ाने के लिए, राज्य के स्वामित्व वाली कंपनी इक्विटी निवेश पारितंत्र में तेजी से प्रगति कर रही है।

खुदरा निवेशकों को बढ़ावा देने के लिए एलआईसी ने अपने पॉलिसीधारकों के लिए कुल शेयरों का लगभग 10% हिस्‍सा अलग रखा है। यह कंपनी की तरफ से उठाया गया पथ प्रदर्शक कदम है, जो पूर्ण रूप से 100% सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी है। सरकार के पास कुल 63.25 करोड़ से अधिक शेयर हैं और इसमें से करीब 31.62 करोड़ शेयर जनता के लिए उपलब्ध होंगे। शेयरों के आवंटन के दौरान पॉलिसीधारकों को छूट दिए जाने की योजना संभावित निवेशकों के उत्साहवर्द्धन का एक और कारण है।

इक्विटी में निवेश करते समय सकारात्मक अनुभव

पिछले कुछ महीनों में आईपीओ में भागीदारी में व्यापक रूप से इजाफा हुआ है। हालांकि, हाल ही में ओवरसब्सक्रिप्शन के कई मामलों की वजह से कई खुदरा निवेशकों को आवंटन के मामले में निराशा ही हाथ लगी है। ऐसे में खुदरा निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए अपने पॉलिसीधारकों के लिए कुल शेयरों का दसवां हिस्सा आरक्षित कर रखा है। हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि इस दिग्गज बीमा कंपनी के पास 29 करोड़ पॉलिसीधारक और निजी पॉलिसी या बीमा के मामले में 74.6% बाजार हिस्सेदारी है। एक नई श्रेणी, ‘पॉलिसीधारक आरक्षण हिस्से’ के साथ, जिन लोगों का कंपनी के साथ पॉलिसीधारक के रूप में लंबे समय से जुड़ाव रहा है, उनके पास आईपीओ का अतिरिक्त हिस्सा पाने का मौका होगा।

पिछले 65 वर्षों से असंख्य पॉलिसी होने के कारण, इस विशेष पॉलिसीधारक श्रेणी के लिए पात्रता अलग-अलग होगी। इन निर्देशों के मुताबिक केवल फरवरी 2022 तक डीमैट खाते और अपडेटेड पैन नंबर वाले मौजूदा भारतीय पॉलिसीधारक ही आरक्षित श्रेणी के तहत शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं। इसके अलावा, नाबालिग की पॉलिसी के प्रस्तावक पॉलिसीधारकों के लिए अलग रखे गए आरक्षित कोटा का इस्तेमाल कर सकते हैं। 2 लाख रुपये तक की आवंटन सीमा के साथ यह शानदार श्रेणी निवेशकों की भागीदारी को बढ़ाएगी और माना जा रहा है कि यह बाजार के सभी रिकॉर्ड को तोड़ने में सफल रहेगी।

दूसरी ओर, पॉलिसीधारकों को अपने इक्विटी शेयरों को अपनी सुविधा औऱ मर्जी के मुताबिक बेचने का लाभ होता है। उनके लिए कोई लॉक इन अवधि नहीं है और यह बड़ी संख्या में खुदरा निवेशकों विशेषकर नए इक्विटी निवेशकों को निवेश के लिए आकर्षित कर सकता है।

नए आईपीओ रुझानों के लिए एक शुरुआती बिंदु
शेयर बाजार में कई गुना खुदरा निवेश देखा जा रहा है, वैसे में एलआईसी के लिए आईपीओ संभावित रूप से निवेशकों के एक नए वर्ग को आगे बढ़ाएगा। पॉलिसीधारकों के लिए नई श्रेणी ने शेयर आवंटन के दायरे को काफी व्यापक बना दिया है। भारत के सबसे बड़े बीमाकर्ता के रूप में, कई पॉलिसीधारक देश भर में मौजूद हैं। आईपीओ के वित्त वर्ष 2021-2022 की चौथी तिमाही तक लॉन्च होने की उम्मीद है और इसकी लोकप्रियता पहली बार निवेशकों के रूप में अधिक पॉलिसीधारकों को आकर्षित करेगी। छूट वाले इश्यू का आकार और आरक्षित हिस्सा पॉलिसीधारकों को सबसे बड़े पीएसयू बीमा कंपनी में हिस्सेदारी लेने के लिए प्रोत्साहित करेगा। यह अधिक खुदरा भागीदारी के पक्ष में आईपीओ नियमों में नए नियमों का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

एक अन्य महत्वपूर्ण कारक एलआईसी आईपीओ के तहत बोली के परिदृश्य में बदलाव है। हाल की रिपोर्ट्स के अनुसार लगभग 1.58 करोड़ शेयर कर्मचारियों के लिए, 3.16 करोड़ शेयर पॉलिसीधारकों के लिए और 9.41 करोड़ शेयर खुदरा निवेशक वर्ग के लिए आरक्षित हैं। सभी तीन श्रेणियों, यानी पॉलिसीधारक, कर्मचारी और एक खुदरा हिस्से के लिए एक व्यक्तिगत आवेदन मान्य होगा। यह खुदरा निवेशकों को कई बोलियां लगाने के लिए नए रास्ते खोलता है।

संक्षेप में, एलआईसी के पॉलिसीधारकों के लिए आईपीओ में एक अलग श्रेणी निर्धारित करने का सरकार का निर्णय इक्विटी बाजार में नए मानदंड को निर्धारित कर रहा है। पॉलिसीधारकों को एक आरक्षित हिस्सेदारी देना वास्तव में अधिक खुदरा भागीदारी को प्रोत्साहित करने के बराबर हो सकता है। इस तरह का कदम भारत की इक्विटी संस्कृति में क्रांतिकारी बदलाव का पहला कदम हो सकता है, जिससे खुदरा निवेशकों को प्राथमिकता दी जा सकती है और संस्थागत निवेशकों का लाभ उठाया जा सकता है।

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