शिवराज कॉलोनी में रहने वाले सौरभ मिश्रा ने MPPSC में किया टॉप, आकांक्षा जैन बनीं डीएसपी!

Akanksha Jainशहर के तिली क्षेत्र में शिवराज कॉलोनी में रहने वाले सौरभ मिश्रा ने एमपीपीएससी 2016 के रिजल्ट में टॉप किया है। उनका चयन डिप्टी कलेक्टर की पोस्ट के लिए हुआ है। मप्र लोक सेवा आयोग ने मंगलवार को पीएससी-2016 का अंतिम रिजल्ट जारी किया। इसमें डिप्टी कलेक्टर की 27, डीएसपी की 50 समेत करीब 150 पोस्ट के लिए उम्मीदवारों का चयन हुआ है। इसमें सागर के सौरभ मिश्रा प्रथम रहे है।सौरभ वर्तमान में इंदौर के देपालपुर उप-जेल में फॉर्मासिस्ट के पद पर पदस्थ हैं। नौकरी करते हुए ही उन्होंने पीएससी की तैयारी की और सिर्फ दो साल की मेहनत में ही यह सफलता प्राप्त की। सौरभ ने मुख्य परीक्षा में 896 और साक्षात्कार में 145 अंक प्राप्त किए। कुल 1041 अंकों के साथ सौरभ ने डिप्टी कलेक्टर पोस्ट के लिए प्रदेश में पहली रैंक प्राप्त की है। इसके पहले वर्ष 2014 में भी पीएससी में चयनित हो चुके हैं।सौरभ बताते हैं कि सफलता के पीछे उनके बड़े पिताजी अशोक मिश्रा, चाचा शरद मिश्रा, पिता संतोष मिश्रा और मां सुनीता मिश्रा का विशेष योगदान है। इसके साथ ही सौरभ के दोस्त भी पढ़ाई में उनकी सहायता करते थे।पीएससी में जिले के कई विद्यार्थियों का चयन, आकांक्षा जैन बनीं डीएसपी पीएससी -2016 के परिणाम में शहर के कई विद्यार्थियों का चयन हुआ है। एक ओर सागर के सौरभ मिश्रा प्रदेश में टॉप कर डिप्टी कलेक्टर बने हैं तो वहीं अन्य विद्यार्थियों ने भी सफलता प्राप्त की है। बंडा में रहने वाली आकंाक्षा जैन का चयन डीएसपी के पद पर हुआ है। आकांक्षा ने पीएससी में यह दूसरी सफलता प्राप्त की है। इसके पहले पीएससी-2015 में आकांक्षा का चयन आबकारी सब इंस्पेक्टर के पद पर हुआ था। आकंक्षा ने दसवीं में 92.3 और बारहवीं में 93.8 प्रतिशत अंक प्राप्त कर संभाग में टॉप किया था। वे पिछले दो वर्षों से पीएससी की तैयारी कर रही हैं। इस दौरान उन्होंने सागर और इंदौर में रहकर कोचिंग भी की।आकांक्षा के पिता अभय जैन शिक्षक हैं उन्होंने अपनी बेटी के लिये एक पिता के साथ-साथ एक शिक्षक की भूमिका भी अच्छी तरह निभाई है। आकांक्षा ने बताया कि उन्होंने स्कूली शिक्षा बंडा के मॉडल स्कूल से ही प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने सागर के गर्ल्स डिग्री कॉलेज से बीएससी किया और फिर पीएससी की तैयारी शुरू कर दी। उनकी इस सफलता के पीछे माता-पिता और शिक्षकों का विशेष योगदान है।

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